लोन के प्रकार एवं इंडिया में दिए जाने वाले लोन के स्वरुप (सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में)

आज भारत में ऋण लेना और उस ऋण से अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना ! भारतीय समाज के हर व्यक्ति की जीवनशेली का अभिन्न अंग हैं!
वर्तमान में मोबाइल से लेकर कार और शादी से लेकर घर और यहाँ तक की हर वित्तीय आवश्यकता हेतु ऋण लिया जाता हैं !
भारत में अनेक वित्तीय संस्थान एवं बैंक हैं जो ऋण के माध्यम से आपके जीवन में वित्तीय स्तर पर आपकी मदद करती हैं !
किन्तु क्या आप जानते हैं इन बेंको अथवा वित्तीय संस्थाओ द्वारा कोन कोन से ऋण और इनके प्रकार क्या क्या हैं? यदि नहीं तो इस लेख में आज मैं आपको वही जानकारी दूंगा !
वेसे तो भारत में सभी प्रकार की बेंक और वित्तीय संस्थाए हैं जो भिन्न भिन्न प्रकार के ऋण उपलब्ध कराती हैं एवं साथ ही उनकी अपनी संस्थागत ऋण वितरण की नियमावली हैं ! किन्तु निचे निम्न बिंदुओ के आधार पर ऋण के प्रकारों पर बात की जा सकती हैं! ये समस्त ऋण के प्रकार तीन प्रकार के पुनर्भुगतान की टर्म्स/अवधि के आधार पर वितरित किये जाते हैं --अल्प,मध्य,दीर्ध कालीन अवधि सभी प्रकार के ऋण में इन अवधि का विशेष महत्त्व होता हैं !

तो आईये जाने ऋण और उसके प्रकार :-

1. व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan );- यह ऋण आपकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए दिया जाता हैं! इसकी अवधि कम और ब्याज जादा होता हैं साथ ही आपकी आय के आकलन के आधार पर इस ऋण को सुन्चित किया जाता हैं ! तथा इसमें ऋण राशी संस्थागत नियमावली के आधार पर होती हैं लेकिन अधिकतर वित्तीय संस्थाए अथवा बेंक इनकी राशि कम ही रखती हैं ! तथा इस प्रकार के समस्त ऋण के ब्याज बैंक/वित्तीय संस्थानों के संस्थागत नियमो के आधार पर होते हैं! ऐसे समस्त ऋण व्यक्तिगत ऋण की श्रेणी में आते हैं इसे पर्सनल लोन/Personal Loan भी कहा जाता हैं !

2. गोल्ड लोन(Gold लोन):- यह ऋण भारत में सबसे प्राचीन ऋण पद्धति से जुडा हैं जहा कई वर्षो पूर्व किसी साहूकार के वहा सोना रखकर ब्याज पर ऋण दिया था किन्तु इसकी लोकप्रियता और भारत जैसे देश जहा गोल्ड/सोना एक ऐसी सम्पत्ति माना जाता हैं जिसे परिवार में आये वित्तीय समस्या के निदान के समय उपयोग किया जाता हैं! इन्ही चीजो को देखकर अनेक बैंक और वित्तीय संस्थाओं ने गोल्ड लोन शुरू किया जिसकी प्रक्रिया अत्यंत सरल हैं! इन ऋण का ब्याज, पुनर्भुगतान का समय, राशि एवं वितरण का प्रकार सभी वित्तीय संस्थान एवं बैंक का अलग अलग प्रारूप होता हैं!

3. प्रतिभूति बंधन के आधार पर ऋण(Loan against Securities):- इन प्रकार के ऋण का अभिप्राय ऐसे ऋण से हैं जिसमे आपको आपके द्वारा निवेश किये गए बीमा,शेयर,वित्तीय बांड,म्यूचल फंड आदि को गिरवी रख कर ऋण हैं! इन समस्त निवेशो के आधार पर इनकी वेल्यु का आप ऋण किसी भी एसी बैंक अथवा वित्तीय संस्था से ऋण ले सकते हैं जो इस प्रकार के ऋण का वितरण करती हो! इसके अलावा आप आपके सेविंग खाते अथवा चालु(करंट) खाते से ओवरड्राफ्ट भी ले सकते हैं यह ओवरड्राफ्ट एक प्रकार की राशि की लिमिट भी होती हैं जो की आपके खाते के संचालन के आधार पर ऋण का मापन होती हैं! इसकी ब्याज राशि एवं पुनर्भुगतान की प्रक्रिया बैंक/वित्तीय संस्था की संथागत नियमो के अधीन होती हैं! किसी किसी बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों में व्यावसायीक सम्पत्तियों को बंधक रखकर भी ऋण वितरित किया जाता हैं इस प्रकार का ऋण भी प्रतिभूति बंधक ऋण हैं!

4. सम्पत्ति ऋण (Property Loan):- संपत्ति पर ऋण को नेशनल हाउसिंग बैंक(NHB) ने दो श्रेणियों में विभक्त किया हुआ हैं! पहला-गृह ऋण(होम लोन) जिसमे रहवासी सम्पत्ति खरीदने/उसे बनाने/सम्पत्ति को विस्तारित करने/सुधारने आदि के उपयोग शामिल हैं!

दुसरा- बंधक ऋण(मोर्टगेज लोन) जिसमे रहवासी संपत्ति को बंधक रखकर शादी,उच्च शिक्षा,व्यवसाय,अन्य सम्पत्ति खरीदी की उपयोता के लिए ऋण दिया जाता हैं ! वर्तमान में लगभग सभी बैंके एवं ज्यादातर वित्तीय संस्थान सम्पत्ति पर ऋण देती हैं! जिनका ब्याज 8.25% से लेकर 18% तक हो सकता हैं ! ब्याज की कीमते हर बैंक और वित्तीय संस्थान में अलग अलग होती हैं ! इसका पुनर्भुगतान 5 वर्ष से लेकर 25 वर्ष तक में किया जा सकता हैं ! इसके साथ ही गृह ऋण में आपको सम्पत्ति के बाजार मूल्य का 70 से 80% ऋण राशि ऋण के रूप में प्राप्त हो सकती हैं! सम्पत्ति ऋण लेने के पूर्व बैंक और वित्तीय संस्थान प्रक्रिया शुल्क,स्टाम शुल्क,सर्फेसी चार्जेस एवं अन्य शुल्क आवेदक से लेती हैं ये समस्त शुल्क सभी बैंको/वित्तीय संस्थानों में अलग अलग हो सकता हैं! ऋण की स्वीकृति बैंक/वित्तीय संस्थान की बैंकिंग/संस्थागत नियम शर्तो के साथ ही साथ संपत्ति के मूल्य,सम्पत्ति के कानूनी दस्तावेज,आपके व्यावसायीक आमदनी के आधार पर निर्धारित की जाती हैं!

 

5. शिक्षा ऋण (Education Loan)- भारत में शिक्षा और उच्च शिक्षा को सरकारों द्वारा हमेशा बढावा दिया जाता रहा हैं इसी मुहीम के अंतर्गत सभी बैंक मेघावी किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा हेतु ऋण उपलब्ध कराती हैं! किन्तु इसे प्राप्त करना एक जटिल प्रक्रिया हैं बैंक इस ऋण के पुनर्भुगतान को ध्यान में रखते हुए अनेक बिन्दुओ को ध्यान में रखकर ऋण देती हैं जेसे छात्र किस कालेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहता हैं, उस यूनिवर्सिटी/कालेज के केम्पस सिलेक्शन कैसे हैं! छात्र की व्यक्तिगत क्षमता केसी हैं, भविष्य में इस छात्र को नोकरी मिलने की संभावनाए क्या हैं! साथ ही छात्र के अभिभावक का व्यव्साय केसा हैं या आमदनी क्या हैं! क्योकि मुख्य ग्यारंटी अभिभावक की ही होती हैं,चुकी इस ऋण का पुनर्भुगतान नोकरी लगने के बाद किया जाता हैं तो इसके ब्याज के सम्बन्ध में सभी बैंक में अलग अलग नियम हो सकते हैं!

6. वाहन ऋण (Vehicle Loan):- यदि आप कार अथवा कोई भी वाहन खरीदना चाहते हैं तो बैंक अथवा वित्तीय संस्थान उसके लिए भी ऋण प्रदान करती हैं बशर्ते आपकी आय वेसी होना चाइये! इन प्रकार के ऋणों में भी ब्याज की रही बैंक और वित्तीय संस्था अलग अलग होती हैं! इसमें लगने वाले प्रक्रिया शुल्क और स्टाम्प के चार्ज भी वित्तीय संस्था अथवा बैंक आपपे चार्ज करती हैं! वाहन मूल्य का लगभग 80-85% ऋण बैंक/संस्था आपको स्वीकृत कर सकती हैं!

7. कॉर्पोरेट ऋण (Corporate Loan)- बैंक बड़े व्यावसायीक उपक्रमों को जो ऋण मुहेया कराता हैं उसे कार्पोरेट ऋण की संज्ञा दी गयी हैं! बैंक बड़े व्यावसायीक उपक्रमों के केपिटल,उसके शेयर वेलुए, मार्केट में उसकी स्थिति आदि आधारों पर ऋण देती हैं! वर्तमान में बैंक अपने केपिटल का 25% तक ऋण इन उपक्रमों को ऋण की स्वीकृति दे सकता हैं!

 

उपरोक्त जानकारी मैरी व्यक्तिगत जानकारी हैं, तथा इस प्रकार की सेवा का उपयोग करने के पूर्व अपने बैंक/संस्थान के नियम व शर्तो को अच्छे से समझ ले !

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Manglesh Rao

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