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लोन लेने हेतु आवश्यक--इच्छा और क्षमता

दोस्तों ,
वर्तमान में लगभग सभी लोग किसी ना किसी वित्तीय परिस्थिति को पूर्ण करने के लिए लोन लेने हेतु आवेदन अवश्य करते हैं।
वर्तमान की आय को देखते हुए व्यक्ति भविष्य की संभावित लोन चुकाने की रूपरेखा बनाता हैं।
और लोन लेकर उसे चुकाना प्रारम्भ करता हैं।
लेकिन अनेक उदाहरणो एवं सर्वे में सामने आया हैं कि अधिकतर लोग ऋण लेने के 2 अथवा 3 वर्ष के पश्चात लोन के पुंर्भगतान में या तो असमर्थ होते हैं या खुद की इच्छा से ऋण का भुगतान नहीं करते।
मुख्यतः ऐसे लोग आने वाले समय में कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं जैसे कानूनी कार्यवाही,कुड़की,नीलामी,कलेक्शन न चुकाये जाने पर अपमान,सामाजिक हास्य,क्रेडिट स्कोर की खराबी आदि।
इन सभी का मुख्य कारण हैं बिना सोच विचार के लिया गया ऋण।
ऋण लेने से पहले आवश्यक हैं कि दो बातों।पर ध्यान रखना एक हैं इच्छा और दूसरी हैं क्षमता।
ऋण लेने की जितनी तीव्र इच्छा हो उतनी ही तीव्र उसे पुनर्भुगतान करने की इच्छा होना आवश्यक हैं।
वही ऋण लेने की वर्तमान क्षमता हैं तो उसे भरने की भविष्य में भी क्षमता हो ऐसा लक्ष आपका होना आवश्यक हैं।
लगभग ज्यादातर लोग ऋण लेते समय ये ध्यान नहीं रखते हैं कि उसे पुनर्भुगतान में इच्छा और क्षमता का होना आवश्यक हैं।
वर्तमान-जब ऋण का आवेदन किया जाता हैं तब तो ऋण को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा होती हैं किंतु समय काल और परिस्थिति में ये इच्छा अनिच्छा में परिवर्तित हो जाती हैं और एक किश्त,दो किश्त,तीन किश्त और बढ़ते बढ़ते किश्तों का अंबार लग जाता हैं वो भी सिर्फ इच्छा की कमी के कारण।इसी के चलते ऋण गृहिता को लज्जित,कानूनी कार्यवाही,असम्मान से गुजरना होता हैं। लगतार पुरभुगतान न करना ऋण अनुबंध का उलंघन माना जाता हैं और यह ये भी दर्शाता हैं कि आपकी।ऋण भुगतान में कोई इच्छा/दिलचस्पी।नहीं हैं ।
इस लिए आप ऋण लेते समय अपनी दृण इच्छा से यह सुनिश्चित करे की इसका पुरभुगतांन भी इसी इच्छा।से किया जायेगा।
ऋण लेते समय हमारी अनेक योजनाएं होती हैं वे योजनाये चाहे मकान बनाने की,व्यवसाय को बढाने की अथवा विवाह या उच्च शिक्षा की हो सकती हैं।
ऋण लेते समय सभी लोग अपने आपको ऋण के पुनर्भुगतान हेतु सक्षम समझते हैं लेकिन खराब परिस्थिति के कारण आप उस ऋण को भरने में सक्षम नहीं हो पाते अतः आप ऋण हेतु।जब भी आवेदित करे अपनी भविष्य की।परिस्थितयो की सक्षमता के आधार पर ऋण ग्रहण करे।
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Manglesh Rao

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