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क्या हैं – FDI, क्या खासियत हैं इसकी ?

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मंगलेश राव, क्लस्टर हेड-सेवा गृह ऋण

FDI आजकल आर्थिक विचार-विमर्श से ज्यादा सिर्फ राजनेतिक विश्लेषण विमर्श का केंद्र बना हुआ हैं! हर व्याक्ति जो मोदी के काम-काज से खुश हैं वो इसके फायदे गिना रहा हैं जो नाखुश हैं वो इसके नुकसान की बाते कर रहा हैं! किन्तु आपको इसकी जानकारी लेनी आवश्यक हैं !

जहा एक और ये बात चल रही हैं की FDI से देश को गिरवी रखा जा रहा हैं तो दूसरी और जो जानकार व्यक्ति हैं वो इसके फायदे भली भाति जानते हैं मेरी द्रष्टि में गिरवी रखने जेसी बात कुछ नहीं हैं ये देश के लिए सिर्फ और सिर्फ व्यापारिक निर्णय मात्र हैं ! देखा जाए तो FDI के तीन मुख्य टार्गेट हैं.पहला निवेश की वृद्धि दुसरा आय में वृधि और तीसरा और अंतिम महत्वपूर्ण लक्ष्य रोजगार को बढ़ावा देना हैं ! किन्तु विचारणीय बात तो यह हैं की केवल
 FDI लागू कर देने मात्र से निवेश आना संभव नहीं होता हैं ! विदेशी निवेश लाने के लिए विभिन्न तत्वों पर ध्यान आकर्षित करना होता हैं, जैसे व्यापार की सरलता,देश में राजनैतिक स्थिरता और सरकार की क्षमता(बहुमत), विदेशी मुद्रा की स्थिति और उसकी की मजबूती,मजबूत राष्ट्रीय आर्थिक नीतिया, सुद्रण सामरिक व्यवस्था, कच्चे माल की पूर्ति एवं उपलब्धताएक्सपर्ट कर्मचारी या श्रमिकों की पूर्ति, मुख्य व्यापरिक ढांचागत सुविधाएं, मजबूत एवं निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाएं, सही श्रमिक कानून एग्जिट सुविधा आदि तत्व के आधार पर ही निवेश को आकर्षित किया जाना संभव हैं !

दिन ब दिन बदलते वैश्विक परिवेश के माहौल में आर्थिक मजबूती ही देश की एकता के लिए मुख्य मानी जाती है! व्यापरिक स्वत्नत्रता और आर्थिक खुलेपन की सोच को ध्यान में रखकर अर्थव्यवस्था को लागू करके पडोसी देश चीन भी मजबूत हुआ और इन्ही चीजो को लागू ना कर पाने की वजह से सोवियत रूस ग्यारह देशों का समूह बन गया! आज FDI के महत्त्व को रूस भी भालीभाती समझने लगा हैं !
FDI में हर समय हो रहे सुधारों और नए क्षेत्रो में निवेश स्वीकारने में भारत एक बड़े और आत्मविश्वास से युक्त देश की तरह काम कर रहा है! भारत विश्व के सबसे बड़े उभरते बाज़ारों में से एक होने के अलावा, कम उम्र एवं तकनीकी ज्ञान संपन्न नवयुवकों का बड़ा देश है ! आज जहा हम एक और विश्व के अलग-अलग बढे से छोटे देशों के उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करते हैं,वही दूसरी और स्वदेशी तकनीक विकसित की और विश्व के अन्य देशो को अपनी सेवाएं बेचने का काम किया! यह आत्मविश्वास हमारे देश के ब्रांड को उन्नत करता है और विदेशी निवेश के लिए अच्छा देश बनाता है!

FDI किसी भी प्रकार का विदेशी ऋण न होकर एक व्यापारिक भागीदारी या सांझेदारी हैं ! क्योकि किसी भी विदेशी निवेशकों को विश्वास तब तक नहीं होगा जब तक उन्हें उनके निवेश पर लाभ होगा नहीं होगा ऐसी स्थिति में यदि भारत उन्हें भागीदारी का विशवास नहीं दिलाता तो वे सभी निवेशक भारत में आने से हिचकिचाएंगे  कम मूल्य पर श्रम की उपलब्धता और करों में सुविधा भी इस आकषर्ण को बढ़ाने में सहायक है! हमें यह भालीभाती ध्यान रखना होगा कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारा युवापन है! जापान-चीन वयोवृद्ध लोगों के देश हैं! भारत असल में यंग इंडिया है किन्तु युवापन हमारी शक्ति के साथ ही साथ हमारी सबसे बड़ी चिंता का विषय भी हैं क्योकि हमें इस यंग जनरेशन को रोजगार देना है!और विदेशी निवेश और व्यापार में वृधि के सिवा उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना शायद संभव न होगा!

बैंक ऋण आधारित अर्थव्यवस्था विकासशील तो बनाये रख सकती है किन्तु विकसित अर्थव्यवस्था ‘वित्तीय दलाली’ पर नहीं स्थिर रह सकती! ‘बैंक ऋण’ उद्यमिता के लिए अच्छा साधन नहीं है,वह सिर्फ उसका सहारा मात्र भर है! इससे विकास का तेजी से आगे बढ़ नहीं सकता!तेज़ विकास के लिए ‘भागीदार पूंजी’ की बहुत जरुरत होती हैं ! ‘इक्विटी कैपिटल’ ही वह साधन है, जो देश की आर्थिक दशा को सुधार सकता हैं! हर व्यापार कुछ न कुछ जोखिम अवश्य होते हैं ! जिस जोखिम में  उतार-चढ़ाव आते रहते हैं! बिजनेस सायकल में उतार के समय बैंक से लिया गया कर्ज ही बड़ा जोखिम बन जाता है! प्रोमोटरों का सारा समय और क्षमता बिजनेस को संभालने के बजाये बैंकों को संतुष्ट करने में ही खराब हो जाती है!
बहुत से व्यापार इसी प्रक्रिया में खराब हुए हैं!

हजारों व्यापार विदेशी पूंजी से फल फुल रहे हैं! हमें ज्यादा से ज्यादा लाभ होता है टैक्स का, रोजगार में भी तरक्की और स्वतन्त्रता मिलती हैं ! तकनीकी संवर्धन होना भी इसी के लाभ हैं !वर्तमान में चाहे मोबाइल हो, वॉलेट हो, ओला हो अथवा  बैंक या बीमा हों सब में विदेशी निवेश समाहित हैं! इसी विदेशी पूंजी से हमें विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है और इसी विदेशी पूंजी के बदले हम सुरक्षा के लिए हथियार खरीदते हैं ! हमने काफी लाभ उठाया है अब तक विदेशी पूंजी का उसका सम्मान होना चाहिए! साथ ही, हमें खुद को विकसित करना चाहिए! हमें ‘FDI’ में तेज़ी से बढ़ना होगा! हाल ही में बहुत से सफल अधिग्रहण हुए हैं! उसका प्रचार होना ही चाहिए कि हमने विदेशों में कौन-कौन से बिजनेस खरीदे हैं!
FDI न केवल देश हित में अच्छी योजना हैं अपितु विदेशी मुद्रा में बढ़ावा,रोजगार के नए क्षेत्रो में वृधि,विश्व पटल पर भारत का व्यापार स्तापित करने के लिए भी आवश्यक हैं,सही अर्थो में कहा जाए तो “FDI देश को विश्व में आर्थिक स्वतन्त्रता देती हैं न की आर्थिक गुलामी!”



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Manglesh Rao

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