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उत्साह,निश्चय और धेर्य--सफलता का उत्तम मार्ग

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Three Step For Success
उत्साहात् निश्चयात् धैर्यात् तत्-तत् कर्म प्रवर्तनात्- श्रील रूप गोस्वामी 
ऊपर लिखा श्लोक निहित ही अपने अर्थो को अच्छे से प्रतिपादित करता हैं ! उक्त श्लोक में श्रील रूप गोस्वामी ने उत्साह,निश्चय और धेर्य को अपने हर कर्म में प्रवर्तनीय करना बताया हैं! लेकिन हमें इसे गंभीरता से समझना होगा की यदि एक इंसान को अपने जीवन के किसी भी भाग में सफलता प्राप्ति के लिए इन तीन रत्नों की आवश्यकता क्यों हैं!
जैसा की शब्दों में निहित हैं की इन्हें मेरी भाषा में मैंने रत्नों की संज्ञा दी हैं और मेरे अनुसार यह कदापि असत्य नहीं होगा की इन तीन रत्नों को धारण करने वाला कभी भी जीवन में असफल होगा!

वैसे तो ये तीनो रत्न मन के विचार हैं और इन विचारो का निरंतर प्रवाह और इसका स्थायीत्व आपके जीवन को सदेव सफलता की और ले जाता हैं! किन्तु इसे अपने हर कर्म में अंगीकार करे बगेर ये संभव न हो पायेगा!

विचार निश्चल हैं नदी के उस सर्प की भाति जो सर्पागती से विचरण करता हैं और उसे पता नहीं होता के किस दिशा में जाना हैं! किन्तु संयम और योग से इन विचारों को स्थायीत्व दिया जा सकता हैं! साथ ही इन विचार रत्नों को इसके स्थायीत्व के पहले अच्छे से भालीभाती समझना आवश्यक हैं! 

तो आईये इन विचार रत्नों को समझे और इसके मस्तिक्ष में स्थायीत्व के गुणों पर भी बात करे!

 उत्साह-  उत्साह जीवन की सबसे बड़ी विचारधारा हैं इस धारा में बहने वाला व्यक्ति कभी भी असफलता की नदी में डूबता नहीं हैं इसलिए जीवन में कोई भी काम हो उसे पुरे उत्साह से करो उत्साह से शुरू किया गया काम उस काम हमेशा पूर्ण होता हैं! उत्साही व्यक्ति अपने जीवन में सदेव् उत्साह को बनाए रखता हैं! लेकिन सदेव ध्यान रहे की कार्य सिर्फ उत्साह से हो ना की अति उत्साह से और एक बार कोई काम उत्साह से शुरू किया हैं तो उसे अगले स्थति में पहुचाये अर्थात धेर्य!

 निश्चय- कार्य को उत्साह से शुरू कर देना न काफी होगा सफलता के लिए बल्कि आपको उसे पूरा करने का पूर्ण निश्चय करना होगा ! निश्चय ऐसा की जिसको कोई डगा नहीं सकता और कोई बाधा इस निश्चय को विचलित न कर सके असल में किसी काम को पूरा करने का निश्चय कर लेना उस काम को 50% पूर्ण कर लेना होता हैं अतेव सदेव कार्य के लिए सफलता के लिए द्रण निश्चयी बने !


 धेर्य --जहा उत्साही होकर आप काम शुरू करते हैं तथा निश्चय से पूरा करने की ठान लेते हैं वहा आपको उस कार्य के पूरा होने का धेर्य रखना आवश्यक हैं ! यदि आपमें सफलता के लिए धेर्य नहीं हैं तो बना बनाया काम बिगड़ सकता हैं अत सफलता की सीडिया धेर्य हैं जिसप्रकार हम किसी भी मकान की सिडियो को बड़े धीरज के साथ धेर्य के साथ एक एक करके ऊपर चड़ते हैं और ऊपर पचुचते हैं उसी प्रकार धेर्य से किया गया कार्य ऊपर अवश्य पहुचता हैं!

इन तीन रत्नों के माध्यम से आप स्व-अर्जित सफलता पाप्त कर सकते हैं मित्रो कोई भी आपको रास्ता बता सकता हैं लेकिन उन रास्तो पर उत्साह,निश्चय और धेर्य के साथ चलना आप ही को पडेगा मैंने भी आपको इस लेख के माध्यम से रास्ता बताने का प्रयास किया हैं ! अगर आपको यह लेख अच्छा लगा और ऐसे ही सकारात्मक आलेख पढ़ना आपको अच्छा लगता हैं तो मेरे इस व्यक्तिगत ब्लॉग को सब्सक्राईब अवश्य करे और अगर आप किसी विषय का लेख चाहते हैं तो मुझे कमेन्ट करके बताये मैं यथासंभव और यथाशीघ्र उस विषय के विश्लेषण के साथ आपको इस ब्लॉग के माध्यम से लेख अवश्य दूंगा!


सबका मंगल हो! सभी का कल्याण हो!
स-धन्यवाद
मंगलेश मधुकर राव

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Manglesh Rao

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