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लोन डिफॉल्टर के कानूनी अधिकार क्या है ? | What is the legal right of a loan defaulter ?

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लोन डिफाल्टर लिस्ट
दोस्तों, कई बार आर्थिक परेशानियों के कारण कई लोग लोन को चुका पाने में नाकाम हो जाते हैं ! ऐसे में बैंक या फाइनेंस कंपनी वाले बार बार परेशान करते हैं ! कई बार तो ये भी देखने में आया हैं परेशान करना इस हद तक बड जाता हैं, कि, वो बैंक और फाइनेंस कम्पनी के लोगो को और लोन लेने वालो को अच्छा नहीं लगता क्योकि बैंक और कम्पनी वाले बेज्जती करने पे उतारू हो जाते हैं ! तो दोस्तों, क्या ऐसे में कोई कानूनी अधिकार हैं ! जिससे इस परेशानी से बचा जाए ?

दोस्तों, आज हम इसी टॉपिक पर बात करेंगे ! की यदि आप किसी कारण से लोन डिफाल्टर हो जाते हैं तो आपके पास कौन-कौन से कानूनी अधिकार हैं ! अगर आपको ये जानकारी समझना हैं तो आपको हमारे साथ आखरी तक बने रहना होगा ! और एक एक पॉइंट को अच्छे से समझना होगा क्योकि हर एक पॉइंट की जानकारी आपके लिए बहुत जरुरी हैं !

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आजकल लोन डिफाल्टर लोगो पर बैंक और फाइनेंस कम्पनिया बहुत ही सख्त हैं ! ऐसे में कोई आम आदमी गलती से अपने होम लोन या पर्सनल लोन में डिफाल्ट हो जाता हैं तो लोन देने वाली बैंक या फाइनेंस कम्पनी उस आदमी को बुरी तरीके से प्रताड़ित करने लगते हैं ! ऐसे में आपको जानकारी होना चाहिये की आपके पास भी कुछ कानूनी अधिकार हैं जिससे ऐसी प्रताड़ना पर रोक लगाईं जा सकती हैं !

पहला कानूनी अधिकार हैं - नोटिस
डिफाल्ट होने के पूर्व आप किसी तरह से अपराधी नहीं हो जाते ! आपसे वसूली करने के लिए बैंक और फाइनेंस कम्पनी की एक प्रोसेस होती हैं ! जिसे सरफेसी एक्ट कहा जाता हैं ! इसमें आपको लोन चुकाने का समय दिया जाता हैं !
इसके अंतर्गत यदि आपने लगातार 3 महीने किश्तों का भुगतान नहीं किया हैं तो आपके लोन खाते को NPA यानी डूबा हुआ लोन मान लिया जाता हैं ! और आपको 60 दिनों का नोटिस जारी किया जाता हैं ! इस अवधि के पुरे होने पर संपत्ति बेचने के लिए भी बैंक को 30 दिनों का एक पब्लिक नोटिस भी जारी करना होता हैं !
ऐसे में आपके पास इतने दिनों का टाइम उस लोन को चुकाने का होता ही हैं !

दुसरा कानूनी अधिकार हैं - अपनी संपत्ति की सही वैल्यू
अगर आप 60 दिनों के नोटिस अवधि में कर्ज नहीं चुका पाते या उस नोटिस का जवाब भी नहीं दे पाते तो बैंक आपकी संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं ! हलाकि इसके पूर्व भी पब्लिक नोटिस बैंक को देना होता हैं ! जिसमे संपत्ति का वर्तमान मूल्य,रिजर्व प्राइस, नीलामी की तारीख आदि का ब्यौरा दिया होता हैं ! ऐसे में आपको लगता हैं की आपकी प्रॉपर्टी वेल्यु कम लगाई गयी हैं तो आप आपत्ति दर्ज करा सकते हैं ! और कोई संपत्ति का बेहतर ग्राहक लाकर सीधे तौर पर उसे बैंक से मिलवा सकते हैं !

तीसरा क़ानूनी अधिकार हैं - बची हुई रकम लेना
अगर आपकी संपत्ति नीलामी की प्रक्रिया में आचुकी हैं तो ये बिलकुल न समझे की आपकी संपत्ति पूरी तरह से हाथ से निकल चुकी हैं ! यहाँ आप नीलामी प्रक्रिया पे पूरी तरह से नजर रखे और संपत्ति बिकने पर बची हुई रकम बैंक से मांगे ! क्योकि लोन बकाया राशी से नीलामी में यदि ज्यादा रिकवरी हुई हैं तो बैंक को वो रकम आपको लौटानी ही होगी!

चौथा क़ानूनी अधिकार - सुनवाई
नोटिस की अवधि के दौरान आप बैंक के अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकते हैं और संपत्ति के कब्जे को लेकर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं ! ऐसे में बैंक अधिकारी को 7 दिन के अन्दर इसका जवाब देना होता हैं ! इसके बाद भी यदि आपकी आपत्ति ख़ारिज की जाती हैं तो अधिकारी को खारिज करने का कोई वेध कारण बताना होता हैं !

पांचवा क़ानूनी अधिकार - मानवीय अधिकार
दोस्तों, बैंक RBI के अंतर्गत काम करती हैं और हाउसिंग फाइनेंस NHB के तहत ऐसे में दोनों रेगुलेटर ने कस्टमर के लिए वसूली के नियम बना रखे हैं "! इनके अंतर्गत कोई भी बैंक या फाइनेंस कम्पनी आपसे अमानवीय तरीके से वसूली नहीं कर सकती ! बैंक के कलेक्शन एजेंट को आपकी प्रायवेसी का पूरा ध्यान रखना होगा साथ ही वे सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बिच ही आपके पास लोन वसीली के लिए आ सकते हैं !


तो दोस्तों ये थे 5 ऐसे क़ानूनी अधिकार जो आपको लोन डिफाल्टर होने के बाद काम आ सकते हैं ! दोस्तों हो सकता हैं आपका कोई मित्र या रिश्तेदार किसी कारण से लोन चुकाने में असमर्थ हो रहा हो और उसे भी बैंक या फाइनेंस कम्पनी के लोग बार बार परेशान कर रहे हो ! तो ये जानकारी उन दोस्तो और रिश्तेदारों से शेयर जरुर करे ! साथ ही इस जानकारी को लाइक भी करे !

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Manglesh Rao

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