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आप डिफाल्टर कब होते हैं और आपपर क्या क्या कार्यवाही हो सकती हैं ?


दोस्तों, पिछली बार मेने लोन डिफाल्टर के कानूनी अधिकारों पर एक आर्टिकल लिखा था जिसे आप लोगो ने काफी पसंद किया और मुझे आपने काफी कमेंट्स भी किये ! उस आर्टिकल में आपने जाना की यदि किसी कारण से आप लोन डिफाल्टर हो जाते हैं तो आप कौनसे कानूनी अधिकार रखते हैं !उसी आर्टिकलकी मदद से आपने समझा की डिफाल्टर के खिलाफ हो रही बैंक या फाइनेंस कम्पनी की कानूनी कार्यवाही से थोड़ी राहत कैसे मिले ! यदि आपने वो आर्टिकलअभी तक नहीं देखि हैं तो आर्टिकल के डिस्क्रिप्शन में या आई बटन पर जाकर आप उसे देख सकते हैं ! इसी कड़ी में आज आपके लिए मैं लाया हूँ की बैंक या फाइनेंस कंपनी कैसे किसी डिफाल्टर पर कार्यवाही करती हैं ! इस आर्टिकलमें स्टेप बाय स्टेप आप जानेंगे की आप डिफाल्टर कब होते हैं और आपपर क्या क्या कार्यवाही हो सकती हैं साथ ही आप जानेंगे की बैंक या फाइनेंस कंपनी किस प्रोसेस से लोन डिफाल्टर पर क़ानूनी कार्यवाही करते हैं !

दोस्तों,वैसे तो लोन डिफाल्टर होना सबसे खराब स्थिति होती हैं ! ऐसा होने से न केवल आप आर्थिक रूप से परेशान होते हैं बल्कि सामाजिक और कानूनी परेशानिया भी झेलना पड़ती हैं ! लोन डिफाल्टर होने पर कानूनी कार्यवाही को स्टेप बाय स्टेप समझने से पहले आपको जानकारी होना चाहिये की आप कब एक लोन डिफाल्टर कहलाते हैं ओर बैंक या फाइनेंस कंपनी आपपर कब कानूनी कार्यवाही शुरू करती हैं !

दोस्तों,वैसे तो जब आप लोन लेते हैं तभी आपको बैंक या फाइनेंस कंपनी अच्छे से समझाती हैं की आपके द्वारा लोन न चुकाए जाने पर क्या क्या हो सकता हैं ! फिर भी आपको बता दे की यदि आपने कोई लोन लिया हैं और आपने लगातार 3 किश्तों का भुगतान नहीं किया हैं और आपके किश्त भुगतान का विलम्ब 90 दिनों तक हो चुका हैं तो बैंक आपके लोन को  NPA यानी नॉन परफोर्मेंस असेट्स घोषित करके आपको डिफाल्टर दर्शा देती हैं ! और फिर आप पर कानूनी कार्यवाही करने का निर्णय लेती हैं !
दोस्तों,90 दिन तक कोई भुगतान न करने पर आप पर सर्फेसी एक्ट 2002 के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू की जाती हैं !
इसमें सबसे पहले आपको एक डिमांड नोटिस भेजा जाता हैं !जिस नोटिस में आपके लोन,संपत्ति,किश्तों की जानकारी और बाकया राशि की जानकारी होती हैं !

इस नोटिस में आपको एक वार्निंग दी जाती हैं की यदि आपने, लिए गए लोन की सम्पूर्ण राशी ब्याज और सभी चार्जेस के साथ अगले 60 दिनों में नहीं चुकाई तो बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी बंधक संपत्ति पर कब्जा लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही करेगी! इस समय अवधि में यदि आपने बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन का पैसा जमा कर दिया तो आगे की कार्यवाही स्थगित की जा सकती हैं किन्तु यदि आपने पैसा जमा नहीं किया तो, बैंक कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी !

दोस्तों नोटिस और समय अवधि में भी आपने लोन नहीं चुकाया तो बैंक या फाइनेंस कंपनी आपको एक और नोटिस भेजेगी जिसमे ये उल्लेखित होगा की आपने दी गयी समय अवधि में बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन की राशि का पुनर्भुगतान नहीं किया हैं ! अब आपके पास अगले तीन या सात दिन का समय हैं आप अपनी संपत्ति खाली करके उसका कब्जा बैंक या फाइनेंस कंपनी को स्वेचा से सौप दे अन्यथा कानूनी मदद लेकर बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी संपत्ति का कब्जा लेगी !

कई बार बहुत से लोग इस नोटिस को भी नजर अंदाज कर देते हैं और अपनी संपत्ति पर कब्जा जमाये रखते हैं ! ऐसे में बैंक आपकी संपत्ति और लोन की डिटेल के साथ आपकी संपत्ति पर कब्जा प्राप्त करने के लिए डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट के पास अपील करते हैं ! डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट सभी तथ्यों को देख कर बैंक या फाइनेंस कंपनी को आपकी संपत्ति के कब्जे सम्बन्धी आर्डर प्रदान करते हैं !

दोस्तों डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट के संपत्ति पर कब्जे सम्बन्धी आर्डर की एक कापी आपको भी भेजी जाती हैं जिसमे ये उल्लेखित होता हैं की अगले 15 दिनों में यदि आपने अपनी संपत्ति खाली नहीं की तो पुलिस की मदद से बलपूर्वक आपसे आपकी संपत्ति खाली कराई जाएगी और उसका कब्जा बैंक या फाइनेंस कंपनी को सौपा जाएगा!
मान लीजिये यदि आपने अगले 15 दिनों के बाद भी संपत्ति खाली नहीं की तो पुलिस आपसे संपत्ति खाली करवा के बैंक या फाइनेंस कंपनी को उसका कब्जा सौप देगी !

इसके बाद बैंक या फाइनेंस कंपनी संपत्ति के नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी ! जिसमे सबसे पहले बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी संपत्ति की वर्तमान कीमत की जांच करवाएगी ! इसमें जो भी कीमत तय होती हैं उसके 80% में अब आपकी संपत्ति की नीलामी की जाती हैं !

नीलामी की प्रक्रिया में अब बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी संपत्ति से जुडी सभी जानकारियों के साथ न्यूज पेपर में एक नोटिफिकेशन या जाहिर सूचना जारी करेगी जिसमे नीलामी की तारीख समय आदि का उल्लेख होगा !
ध्यान रखे यदि नीलामी की तारीख से पूर्व ही यदि बैंक के पास संपत्ति का कोई खरीददार तय कीमत से ज्यादा देने के लिए तेयार हो जाता हैं तो बैंक को उसे, संपत्ति बेचने का अधिकार होता हैं ! और वो सेल सर्टिफिकेट के माध्यम से उसे या नीलामी में संपत्ति तय कीमत से ज्यादा में बेच सकती हैं !

यदि संपत्ति लोन की कीमत से ज्यादा में बिकती हैं तो आपको संपत्ति की  बची राशी बैंक से मांगने का अधिकार हैं !

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Manglesh Rao

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